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गणेश जी, शिव जी, विष्णु भगवान, लक्ष्मी माता, दुर्गा माँ, हनुमान जी, श्री कृष्ण, श्री राम, सरस्वती माता, संतोषी माता, शनि देव और साईं बाबा की सम्पूर्ण आरतियाँ — शुद्ध हिंदी पाठ के साथ। पूजा, त्योहार और नित्य आराधना के लिए।

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गणेश जी की आरती

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥ एक दन्त दयावन्त, चार भुजा धारी। माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी॥ पान चढ़ें फूल चढ़ें, और चढ़ें मेवा। लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा॥ जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥ अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया। बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥ 'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा। जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा॥

ॐ जय जगदीश हरे (विष्णु आरती)

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का। सुख-सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय... मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥ ॐ जय... तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय... तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता। मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय... तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय... दीनबन्धु दुखहर्ता, ठाकुर तुम मेरे। अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय... विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥ ॐ जय जगदीश हरे॥

शिव जी की आरती — ॐ जय शिव ओंकारा

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय... एकानन चतुरानन पंचानन राजे। हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय... दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे। त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय... अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी। त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥ ॐ जय... श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे। सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥ ॐ जय... कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूलधारी। सुखकारी दुखहारी जगपालनकारी॥ ॐ जय... ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका॥ ॐ जय... त्रिगुणस्वामी जी की आरती जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥

लक्ष्मी जी की आरती

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥ ॐ जय... उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता। सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ ॐ जय... दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥ ॐ जय... तुम पाताल-निवासिनी, तुम ही शुभदाता। कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥ ॐ जय... जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता। सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥ ॐ जय... तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता। खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥ ॐ जय... शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता। रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥ ॐ जय... महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता। उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

दुर्गा जी की आरती — जय अम्बे गौरी

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ जय... मांग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को। उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥ जय... कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै। रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥ जय... केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी। सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥ जय... कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योती॥ जय... शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥ जय... चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे। मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥ जय... ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी। आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥ जय... चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरों। बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥ जय... तुम ही जग की माता, तुम ही हो भर्ता। भक्तन की दुख हर्ता, सुख सम्पत्ति कर्ता॥ जय... भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी। मनवांछित फल पावत, सेवत नर-नारी॥ जय... कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती। श्री मालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती॥ जय... श्री अम्बेजी की आरति, जो कोइ नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे॥ जय अम्बे गौरी॥

हनुमान जी की आरती

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥ जाके बल से गिरिवर काँपे। रोग दोष जाके निकट न झाँके॥ अंजनि पुत्र महा बलदाई। सन्तन के प्रभु सदा सहाई॥ दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारि सिया सुधि लाए॥ लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥ लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज सँवारे॥ लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आनि संजीवन प्राण उबारे॥ पैठि पताल तोरि जम-कारे। अहिरावण की भुजा उखारे॥ बाईं भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे॥ सुर नर मुनि आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें॥ कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई॥ जो हनुमानजी की आरती गावे। बसि बैकुण्ठ परमपद पावे॥

श्री कृष्ण आरती — आरती कुंजबिहारी की

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥ गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला। श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला॥ गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली। लतन में ठाढ़े बनमाली, भ्रमर सी अलक कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की॥ आरती... कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं। गगन सों सुमन रासि बरसै, बजे मुरचंग मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग अतुल रति गोप कुमारी की॥ आरती... जहां ते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा। स्मरन ते होत मोह भंगा, बसी शिव सीस जटा के बीच, हरै अघ कीच चरन छवि श्री बनवारी की॥ आरती... चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू। चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू, हंसत मृदु मंद चांदनी चंद, कटत भव फंद टेर सुनु दीन भिखारी की॥ आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

श्री राम जी की आरती

आरती कीजै श्री रघुवर जी की, सत चित आनन्द शिव सुन्दर की॥ दशरथ-तनय कौसल्या-नन्दन, सुर-मुनि-रक्षक दैत्य-निकन्दन। अनुगत-भक्त भक्त-उर-चन्दन, मर्यादा-पुरुषोत्तम वर की॥ आरती... निर्गुण सगुण अनूप रूप-निधि, सकल लोक-व्यापक हरि सर्वविधि। हरण शोक-भय दायक सब सिधि, मायारहित दिव्य नर-वर की॥ आरती... जानकीपति सुरअधिपति जगपति, अखिल लोक-पालक त्रिलोक-गति। विश्व-वन्द्य अनवद्य अमित-मति, एकमात्र गति सचराचर की॥ आरती... शरणागत-वत्सल व्रतधारी, भक्त-कल्पतरु-वर असुरारी। नाम लेत जग पावनकारी, वानर-सखा दीन दुख हर की॥ आरती कीजै श्री रघुवर जी की॥

सरस्वती जी की आरती

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता। सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ जय... चन्द्रवदनि पद्मासिनी, द्युति मंगलकारी। सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥ जय... बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला। शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला॥ जय... देवि शरण जो आए, उनका उद्धार किया। पैठि मंथरा दासी, रावण संहार किया॥ जय... विद्या ज्ञान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश भरो। मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो॥ जय... धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो। ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो॥ जय... माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे। हितकारी सुखकारी, ज्ञान भक्ति पावे॥ जय सरस्वती माता॥

संतोषी माता की आरती

जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता। अपने सेवक जन की, सुख सम्पत्ति दाता॥ जय... सुन्दर चीर सुनहरी, माँ धारण कीन्हो। हीरा पन्ना दमके, तन शृंगार लीन्हो॥ जय... गेरू लाल छटा छवि, बदन कमल सोहे। मंद हंसत करुणामयी, त्रिभुवन जन मोहे॥ जय... स्वर्ण सिंहासन बैठी, चंवर दुरें प्यारे। धूप, दीप, मधु, मेवा, भोग धरें न्यारे॥ जय... गुड़ अरु चना परम प्रिय, ता में संतोष कियो। संतोषी कहलाई, भक्तन विभव दियो॥ जय... शुक्रवार प्रिय मानत, आज दिवस सोही। भक्त मंडली छाई, कथा सुनत मोही॥ जय... मंदिर जगमग ज्योति, मंगल ध्वनि छाई। विनय करें हम सेवक, चरनन सिर नाई॥ जय... भक्ति भावमय पूजा, अंगीकृत कीजै। जो मन बसे हमारे, इच्छित फल दीजै॥ जय... दुखी दरिद्री रोगी, संकटमुक्त किए। बहु धन धान्य भरे घर, सुख सौभाग्य दिए॥ जय... संतोषी माता की आरती, जो कोई जन गावे। ऋद्धि सिद्धि सुख सम्पत्ति, जी भर के पावे॥ जय संतोषी माता॥

शनि देव की आरती

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥ जय... श्याम अंग वक्र-दृष्टि चतुर्भुजा धारी। नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥ जय... क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है लिलारी। मुक्तन की माल गले शोभित बलिहारी॥ जय... मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी। लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥ जय... देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी। विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥ जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी॥

साईं बाबा की आरती

आरती साईं बाबा, सौख्यदातार जीवा। चरणरजातली, द्यावा दासां विसावा, भक्तां विसावा॥ आरती... जाळुनियां अनंग, स्वस्वरूपी राहे दंग। मुमुक्षू जनां दावी, निज डोळां श्रीरंग॥ आरती... जयामनी जैसा भाव, तया तैसा अनुभव। दाविसी दयाघना, ऐसी तुझी ही माव॥ आरती... तुमचे नाम ध्याता, हरे संस्कृती व्यथा। अगाध तव करणी, मार्ग दाविसी अनाथा॥ आरती... कलियुगी अवतार, सगुण परब्रह्म साचार। अवतीर्ण झालासे, स्वामी दत्त दिगंबर॥ आरती साईं बाबा॥

आरती से जुड़े प्रश्न

आरती कब करनी चाहिए?
प्रातः स्नान के बाद और संध्या को सूर्यास्त के समय आरती करना सर्वोत्तम माना गया है।
आरती में कितने दीपक होने चाहिए?
एक, तीन, पाँच या सात बत्तियों वाला दीपक शुभ माना जाता है; घी का दीपक सर्वश्रेष्ठ है।
आरती के बाद क्या करें?
आरती के बाद परिक्रमा, पुष्पांजलि और प्रसाद वितरण करें, तथा दोनों हाथों से आरती की लौ ग्रहण करें।

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