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कुंडली कैसे बनाएं और पढ़ें — पूरी जानकारी

जन्म कुंडली (जन्म पत्रिका) आपके जन्म के समय आकाश में ग्रहों की स्थिति का नक्शा है। इसे बनाने के लिए तीन चीज़ें चाहिए — जन्म तिथि, सटीक जन्म समय और जन्म स्थान। इन्हीं तीनों से लग्न (Ascendant) और सभी नौ ग्रहों की राशि-स्थिति निकाली जाती है। आप AstroWalia के मुफ़्त कुंडली कैलकुलेटर में यह विवरण भरकर सेकंडों में अपनी कुंडली बना सकते हैं।

कुंडली के 12 भाव क्या बताते हैं

उत्तर भारतीय कुंडली में बीच का सबसे ऊपर वाला खाना पहला भाव (लग्न) होता है और उससे वामावर्त गिनती चलती है। पहला भाव स्वयं व स्वास्थ्य, दूसरा धन-कुटुंब, तीसरा पराक्रम, चौथा माता-गृह, पाँचवाँ संतान-विद्या, छठा रोग-ऋण, सातवाँ विवाह, आठवाँ आयु-बाधा, नौवाँ भाग्य-धर्म, दसवाँ करियर, ग्यारहवाँ लाभ और बारहवाँ व्यय-विदेश दर्शाता है। किसी भी प्रश्न का उत्तर देखने के लिए सम्बंधित भाव, उसका स्वामी ग्रह और उसमें बैठे ग्रह — ये तीनों देखे जाते हैं।

लग्न, चंद्र राशि और सूर्य राशि का अंतर

लग्न जन्म के क्षण पूर्व क्षितिज पर उदित राशि है — यह शरीर व व्यक्तित्व की मूल प्रकृति बताता है। चंद्र राशि वह राशि है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा था — भारतीय ज्योतिष में दैनिक/मासिक राशिफल और दशा-गणना इसी से होती है। सूर्य राशि पश्चिमी ज्योतिष का आधार है। इसलिए जब आप राशिफल पढ़ें, तो चंद्र राशि से पढ़ना अधिक सटीक माना जाता है।

नक्षत्र और महादशा

चंद्रमा जिस नक्षत्र में हो, वही आपका जन्म नक्षत्र है। इसी से विंशोत्तरी महादशा का क्रम शुरू होता है, जो बताता है कि जीवन के किस काल में कौन-सा ग्रह फल देगा। AstroWalia की कुंडली में आपको अगले 25 वर्षों की दशा-तालिका स्वतः मिलती है।

शुरुआती लोगों के लिए 3 सूत्र

1) पहले लग्न व लग्नेश की स्थिति देखें — यही कुंडली की नींव है। 2) चंद्रमा की राशि-नक्षत्र से मन व दशा समझें। 3) गुरु व शनि का गोचर देखें — यही बड़े बदलावों का समय बताता है। अभ्यास के लिए अपनी और परिजनों की कुंडलियाँ बनाकर भावों को मिलाइए — कुछ ही हफ़्तों में पढ़ना आने लगेगा।

👉 आगे पढ़ें: कुंडली मिलान के 36 गुण · साढ़े साती के उपाय

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