मंगल दोष क्या है? पहचान, प्रभाव और उपाय
जन्म कुंडली में मंगल यदि लग्न से 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में हो तो मंगल दोष (मांगलिक योग) माना जाता है। दक्षिण भारत में दूसरा भाव भी गिना जाता है। चूँकि ये भाव विवाह, गृहस्थ सुख व दांपत्य से जुड़े हैं, उग्र मंगल यहाँ वैवाहिक जीवन में तनाव, विलंब या टकराव दे सकता है। अपनी कुंडली बनाकर मंगल की भाव-स्थिति देखें।
घबराएँ नहीं — दोष भंग की स्थितियाँ
शास्त्रों में मंगल दोष के अनेक स्वतः-परिहार बताए गए हैं: मंगल स्वराशि (मेष, वृश्चिक) या उच्च (मकर) में हो; गुरु या चंद्र की दृष्टि मंगल पर हो; अथवा दोनों वर-वधू मांगलिक हों — तब दोष प्रायः निष्क्रिय माना जाता है। लगभग हर तीसरी कुंडली मांगलिक होती है, अतः यह दुर्लभ दोष नहीं बल्कि सामान्य योग है जिसका सही आकलन ज़रूरी है।
शास्त्रोक्त उपाय
1) मंगलवार को हनुमान जी की उपासना व सुंदरकांड पाठ। 2) मंगल बीज मंत्र "ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः" — विधि मंत्र संग्रह में। 3) मंगलवार को मसूर दाल, लाल वस्त्र, गुड़ व ताँबे का दान। 4) कुंभ विवाह/विष्णु विवाह जैसे प्रतीकात्मक विधान — योग्य आचार्य की देखरेख में। 5) मूंगा रत्न केवल कुंडली-परीक्षण के बाद। 6) क्रोध-प्रबंधन व नियमित व्यायाम — मंगल की ऊर्जा को सही दिशा देना ही सर्वोत्तम उपाय है।
विवाह से पहले क्या करें
गुण मिलान के साथ दोनों कुंडलियों में मंगल की स्थिति अवश्य मिलवाएँ। याद रखें — मंगल दोष विवाह का निषेध नहीं, केवल सावधानी का संकेत है। 36 गुण मिलान की पूरी विधि यहाँ पढ़ें।